लखनऊ (उत्तर प्रदेश) : 23 जुलाई 2020
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प्रोफेसर सिंह ने आयोग की तरफ से जारी सर्कुलर में बताया है कि प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण -संवर्धन के लिए स्थाई एवं अस्थाई गोवंश संरक्षण केंद्र / स्थल प्रदेश भर में स्थापित किए गए हैं जिनकी बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ।ऐसे स्थलों की देख=रेख एवं मरम्मत नहीं हो पाने से पानी का जमाव तथा कीचड़ हो जाता है जो गौशाला पशुओं के लिए परेशानी ही नहीं जानलेवा बीमारी का कारण बनता है। बरसात के समय में वैसे भी खुरपका - मुंहपका ,गलघोटू , लंगडी आदि संक्रामक रोग तेजी से फैलती हैं और इन बीमारियों के रोकथाम की व्यवस्था में लापरवाही से गौशाला पशुओं की जान चली जाती है है। इसलिए सभी संरक्षण केंद्रों ,गौशालाओं तथा पशु -आश्रय स्थलों की सफाई एवं मरम्मत के साथ-साथ टीकाकरण तथा अन्य चिकित्सा संबंधी सावधानियां सुनिश्चित किया जाए। इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए।
सर्कुलर के माध्यम से उन्होंने आगे उन्होंने यह भी कहा है कि प्रदेश में जहां कहीं भी संबंधित जिला के परि क्षेत्र में पशु दुर्घटना से घायल हो जाते हैं उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए। सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त पशु को किसी भी हालत में पड़े नहीं रहना चाहिए। जिला प्रशासन द्वारा हर हालत में गौशाला पशुओं के रख-रखाव एवं स्वास्थ्य संबंधी हर समस्या के निराकरण के लिए अधीनस्थ विभाग को हिदायत देकर पशुओं की सुरक्षा की जाए।
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