ANIMAL WELFARE

Wednesday, 8 April 2020

केंद्र सरकार के आदेश के बाद एनिमल फीडिंग पास न मिलने पर संपर्क करें , तुरंत व्यवस्था की जाएगी..

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भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी एडवाइजरी  का पालन  अति आवश्यक - वर्तमान संक्रमण के बीच भूख से पशु मृत्यु रोकना जरूरी - लॉक डाउन की हालात में पशु- पक्षियों को दाना -पानी देते रहें : गिरीश जयंतीलाल शाह

8 अप्रैल 2020 ; मुंबई महाराष्ट्र

करोना वायरस के तहत जारी लॉक डाउन के स्थिति में भारत सरकार ने सिर्फ मनुष्य के ही दुख - दर्द की ही
चिंता नहीं की है बल्कि , पशु - पक्षियों से संबंधित सभी जन स्वास्थ्य के मामले में सतर्कता बरतने के लिए  दिशा - निर्देश जारी किए हैं।  केंद्रीय पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य मंत्रालय द्वारा  बड़े पशुओं से लेकर छोटे पशुओं को  भोजन - पानी प्रबंधन  उपलब्ध कराने  के मामले में सभी राज्य सरकारों को जारी एक अत्यंत महत्वपूर्ण एडवाइजरी  को भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य गिरीश जयंतीलाल शाह ने देश भर के जिलाधिकारियों  एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा प्रेषित कर आग्रह किया है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी पालतू एवं गैर पालतू सभी प्रकार के पशु- पक्षियों के भोजन - पानी की सुविधा मुहैया कराने के लिए सुविधा अवश्य प्रदान की जाए क्योंकि चारे दाने या स्वास्थ्य संबंधी असुविधाओं के नाते पशुओं के मरने से कोरोनावायरस के नियंत्रण की स्थिति और गंभीर हो जाएगी। जिन लोगों को केंद्र सरकार के आदेश के बाद भी एनिमल फीडिंग के लिए पास या कार्ड नहीं मिल पा रहा है, वह कृपया तुरंत संपर्क करें .

इस संबंध में शाह ने  केंद्र सरकार द्वारा जारी दिनांक 23 मार्च 2020 के उस एडवाइजरी के महत्व को बताते हुए
देशभर के सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि इस समय देश में पशुओं के कल्याण से संबंधित मामले को देखने वाले भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के चेयरमैन द्वारा प्रेषित सभी मुख्य सचिवों के पत्र/एडवाइजरी के परिपालन में संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिशा निर्देश देना और उसका प्रति पालनकिया जानाअत्यंत आवश्यक है ताकि  पालतू अथवा गैर पालतू पशु पक्षियों के भोजन पानी अथवा स्वास्थ्य संबंधित देखभाल का प्रबंध निरंतर जारी रहे , क्योंकिसुविधाओं के कारणपशुओं के मृत्यु के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं।मरे हुए पशुओं के द्वारा बीमारियों को फैलने कीसमस्याएं और विकराल हो जाएंगी। इसलिए ,इस कार्य के लिए जिम्मेदार विभाग- पशुपालन , नगर  निगम/पालिकाएं  या पंचायतें  अपने अपने क्षेत्रों में पशु पक्षियों को दाना-पानी देने में पशु प्रेमियों एवं किसानों को नियमानुसार सहूलियत प्रदान करें।

शाह  के अनुसार भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के चेयरमैन द्वारा राज्य सरकारों को  प्रेषित दिशा निर्देशन का संबंधित विभाग द्वारा गंभीरता से पालन अति आवश्यक है ।उन्होंने यह भी कहा है कि जिन पशु प्रेमियों को एनिमल फीडिंग और आवश्यक प्रबंधन की सुविधा हेतु  स्थानीय प्रशासन द्वारा कार्ड या पास नहीं मिल पा रहा है उन्हें सीधे भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड से संपर्क करना चाहिए ताकि बोर्ड सेसंबंधित विभाग से सीधे संपर्क किया जा सके औरएनिमल फीडिंग कार्ड दिलाया जा सके।उन्होंने यह भी कहा कि  भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के चेयरमैन  द्वारा जारी दिशा निर्देशन कब हर जगह प्रति पालन हो रहा है बशर्ते पशु कल्याण के उद्देश्य से काम कर रहे व्यक्ति उचित जगह पर यदि संपर्क करें तो उन्हें एनिमल फीडिंग के लिए सुविधा अवश्य प्रदान की जाएगी। 

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Sunday, 5 April 2020

आहार शास्त्र से लेकर आदर्श जीवनशैली अपनाने के लिए भगवान महावीर का दर्शन शास्त्र -"आहार मीमांसा" पढ़ें



भगवान महावीर ने "अहिंसा परमो धर्मः" के संदेश से जीवन जीने की कला सिखाई

@ गिरीश जयंतीलाल शाह

आज समूचा विश्व कोरोना वायरस की जानलेवा भय से जूझ रहा है। चाइना जैसे वन्य जंतुओं को विनाश की कगार पर ले जाने वाला देश को समूची दुनिया कोस रही है। ऐसे परिपेक्ष में भारतीय संस्कृति, रीति-रिवाजों एवं जीवन शैली "अहिंसा परमो धर्म:" का संदेश बताने वाले भगवान महावीर की वाणी से दुनिया भर में सीख ली जाती है। इस महान संदेश को याद कर इस साल तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती 6 अप्रैल को मनाई जाएगी । दरअसल, जन्म-जयंती जेसे शब्द हमारी परंपरामें प्रयोग नहीं किए जाते है। भगवान का जन्म पूरे विश्व के कल्याण के लिए हुआ था।  पहला  कल्याणक माता की कोख में अवतरण हुआ इसलिए च्यवन कल्याणक कहते है।  भगवान के जनम को दूसरा कल्याणक अथवा जनम कल्याणक कहते है जब भगवान दीक्षा लेते है सब कुछ त्याग करके इसे तीसरा कल्याणक कहते है।  चौथा है जब उन्हें सम्पूर्ण ज्ञान होता है उसे केवलज्ञान कल्याणक कहते है और पांचवा है जब भगवान का निर्वाण होता है इसे निर्वाण या मोक्ष कल्याणक कहते है।  इस प्रकार भगवान के जीवन में एसे पांच कल्याणक होते है। 

जैन धर्म परंपरा यह अनादि से चली आ रही है।  उस परंपरा में परमात्मा आदेश्वर भगवान जो हमारे चोवीस तीर्थंकर में से प्रथम थे, इन्होने क्षेत्रकाल के प्रथम धर्म की स्थापना की।  हम उसे शासन स्थापना कहते है, जैसे महाराष्ट्र शासन , गुजरात शासन, केन्द्र शासन वैसे ही शासन का मतलब व्यवस्था। व्यवस्था का स्थापन भगवान महावीर ने किया।  अक्षय तृतीया के सात दिन के बाद वैशाख शुक्ल ग्यारस को इस समय के 21 हजार साल की शासन की स्थापना महावीर भगवान ने की। कोई चीज उत्पन्न होती है, स्थिर होती है ओर फिर नाश होती है।  यह सनातन सत्य है।  सनातन सत्य के आधार पर परमात्मा फिर जो केवल ज्ञान है, प्रकाश होता है, इसके माध्यम से प्रवचन करते है  और प्रवचन के माध्यम से वह पूरे विश्व को, प्रजा को, समाज को जीवन जीने की कला सिखाते है।  मतलब कम से कम पाप करके जीवन कैसे जिया जाये उसकी सारी कलाए भगवान सिखाते है।  मै यह मानता हु कि जैन धर्म जीवन जीने की पद्धति है। 

आजकल लोग मजाक मजाक में कहते है कि क्या है ये, ये नहीं खाना, वह नहीं खाना, रात को नहीं खाना,कंदमूल नहीं खाना, ये नहीं करना,वो नहीं करना  लेकिन अब कोरोना वायरस से सब संकट में आ गए है तब उन्हें समझ में आ रहा है कि  नियमों का पालन एवं परहेज करना कितना जरुरी है | अब लोग हमारी सनातन परंपरा को स्वीकार कर रहे है और हाथ मिलाने के बजाये नमस्ते कह कर अभिनंदन कर रहे है। हमारे यहाँ तो बहुत पहले से ही यह परंपरा अस्तित्व में है हमें सर्व प्रथम प्रणाम सिखाया गया था।  आज डर कर मास्क लगा रहे है। हम तो पहले से ही मास्क लगाते आ रहे है।  हम मंदिर में भी भगवान की पूजा के लिए जाते है तो मास्क अष्टपड़ - रुमाल लगा कर जाते है।  भगवान तो प्रतिमा रूप में है बावजूद इसके मुँह और नाक ढंके बिना भगवान की पूजा की मनाही है। इतना ही नहीं किसी से बात भी करोगे तो उस समय अष्टकोण रुमाल (मुह्प्त्ती) मुह पर रखकर ही बात करोगे।  हमारी परंपरा में स्थानकवासी जो परंपरा है वह तो मुह पर कपडे बांधकर ही रखते है।  कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में मास्क का बिजनेस बढ़ गया है।  लेकिन हमारे यहाँ तो पहले से ही है। 
  
हमारे यहाँ मुह या खाँसी – छींक से निकलने वाला वायरस किसी अन्य तक न पहुंचे, किसी को कोई नुकसान न पहुंचाए, उसका भी ख्याल रखने की बात भगवान महावीर ने बताई थी। महावीर ने यही संदेश दिया था की दुसरो को तकलीफ न दो, ऐसा जीवन जियो।  और “जियो  और जीने दो” . भगवान महावीर से बड़ा कोई पर्यावरणप्रेमी कोई हो ही नहीं सकता।  इन्होंने सभी जीवमात्र के कल्याण की बात कही। आहार शास्त्र से लेकर जीवनशैली कैसी होनी चाहिए, इस बारे में भगवान महावीर ने संपूर्ण मार्गदर्शन दिया है। आहार मीमांसा नामक ग्रंथ में बहुत ही विस्तारपूर्वक इसका वर्णन किया गया है।  इसके अलावा हमारा व्यवहार माता पिता के साथ,भाई बहन, मित्र, पड़ोसी आदि के साथ कैसा होना चाहिए इस सबंध में भी बताया गया है।

भगवान महावीर ने बहुत ही सुंदर तरीके से सामाजिक बंधुत्व के लिए अपनी भावना एवं विचार प्रस्तुत किया है। कहा कि  विश्व के संपूर्ण जीव हमारा कुटुंब है हमें  हमें मैत्रीभाव रखना चाहिए।  केवल अपने परिवार के साथ ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को अपना मानने की बात भगवान महावीर ने हमें सिखाई है।  भगवान ने कहा है की किसी भी जीव के प्रति मन में किसी प्रकार की दुर्भावना न रखे।  किसी भी प्राणी के प्रति अपना मन मुटाव हुआ हो तो “मिच्छामी दुक्कड़म”कह कर हमें उनसे क्षमा मांगनी चाहिए।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लोक सभा सदन में “मिच्छामी दुक्कड़म” कह कर क्षमा याचना कर अपनी भावनाए सभी के बीच जाहिर की है।  यदि रात के समय भी हम से कोई गलती हो जाये या किसीके प्रति मन मे ख्याल भी आ जाए तो सुबह उठकर “मिच्छामी दुक्कड़म” कह कर हम मांफी मागते है और पश्चाताप करते है।  जीवन मात्र के प्रति करुणा का भाव रखने का विश्व संदेश सामाजिक बंधुत्व के तहत भगवान महावीर ने दिया है। 

समस्त महाजन संस्था भगवान महावीर भगवान के किन आदेशो पर चलते हुए ग्रामविकास के सपने को साकार करने के लिए कार्यरत है ? भगवान महावीर ने ग्रामविकास के लिए क्या उपदेश दिया है ? मैंने पहले ही कहा था की भगवान महावीर सबसे बड़े पर्यावरण प्रेमी थे, वह पेड़ के पत्ते तक नहीं तोड़ते थे, वह पेड़ के पत्ते में भी जीव है ऐसा सोचते थे।  क्योंकि उन्हें परमात्मा को जो संपूर्ण सत्य प्रकाश ज्ञान हुआ वह वृक्ष के निचे हुआ और वह भी नदी किनारे हुआ।  नदी और वृक्ष सबसे समीप भगवान रहते है, यूँ  कह सकते है की उनसे जुड़ गए है।  यदि ऐसा नहीं होता तो बड़े बड़े राजभवन में भी परमात्मा का सत्य ज्ञान प्रकाशित होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  इसका अर्थ है परमात्मा नदी-वृक्ष प्रकृति से गहरे जुड़ गए है।  अभी यह कह सकते है की परमात्मा से संपर्क स्थापित करने का एन्टीना तो यही है।  भारत एक समय सोने की चिड़िया कहा जाता था, भारत सोने की चिड़िया तभी रहेगी जब हम पशु कल्याण,वृक्ष कल्याण,जल कल्याण इन तीनो को संरक्षित एवं संवर्धित कर पायेगे।  ग्रामविकास के संदर्भ में भगवान महावीर ने यह सारी बातो का उपदेश दिया है और समस्त महाजन संस्था भगवान के विचारों की पूर्ती के लिए ही ग्रामविकास के लिए पूरी तन्मयता से जूडी हुई है। 

भगवान महावीर के विचार कालजयी है, वे सदैव प्रासंगिक बने रहेंगे मै मानता हु की आज भी वह 100  प्रतिशत प्रासंगिक है।  जीवन जीनेका जो संदेश भगवान महावीर ने संसार को दिया है यही इस तरह से अखिल विश्व जीवन जीना शुरू करदे तो शांति, सदाचार, सौहार्द, संपन्नता और चारो ओर आनंद ही आनंद हो जायेगा।  कोई किसी का दुश्मन नहीं रहेंगा।  विश्व में कही भी युध्ध नहीं होगा।  सभी मिलजुल कर रहेंगे।  दुनिया आज पैसो के पीछे भाग रही है।  संवेदनहीन हो चले है, तनावभर जीवन लोग जी रहे है।  भगवान महावीर ने इस समय ही कह दिया था की परिग्रही बनो अर्थात एक मर्यादा में रह कर ही पूण्य एवं पुरुषार्थ के बल पर प्राप्त मात्रा में जो धन आपको मिले, उससे ही ख़ुशी ख़ुशी अपने जीवन का निर्वाह करो।  इससे आप सदा आनंदित भी रहोगे और तनाव भी नहीं होगा।  भगवान महावीर ने विषयुक्त आहार का सेवन करने की मनाही  की है।  ऑर्गेनिक खेती का ही अन्न सेवन करने के योग्य है। सर्व प्रथम अहिंसा का संदेश इन्होंने ही दिया।  किसी जीव के साथ हिंसा मत करो।  एसी अनेकाअनेक सुंदर व्यवस्थाए इन्होंने बताई।  इसीलिए भगवान महावीर जन्मकल्याणक के शुभ अवसर पर मेरा यही संदेश है की स्वस्थ, निरोगी, सहस्तित्व के साथ प्रेमपूर्वक जीना चाहते हो तो भगवान महावीर के बताए रास्तो पर चलो। उससे सभी का भला होगा।  भगवान महावीर के विचारो को अमल में लाने पर ही जीवन का कल्याण निहित है।  

मेरे गुरुदेव परम तारक पन्यास चंद्रशेखरविजय महाराज की प्रेरणा ओर आशीर्वाद से वर्ष 1994 -1996 से मैंने सामाजिक कार्य की शरुआत की और इसके बाद 2002 में समस्त महाजन संस्था की स्थापना की।  हमने केवल जैन समाज के नामसे इस ट्रस्ट की शरुआत नहीं की क्योंकि हमारे भगवान तो सब के है। इसीलिए सभी के लिए हमने समस्त महाजन अर्थात अच्छे लोगो का समूह, इस “समस्त महाजन” संस्था नामसे ट्रस्ट की शरुआत की।  आज विश्वमे सज्जनों की संख्या बढे तो दुर्जनोका प्रभाव कम हो जाएगा।  सज्जनों की निष्क्रियता से ही सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। यदि सज्जन शक्ति सक्रिय हो जाये तो विश्व का कल्याण हो जायेगा।  हमने भारत या मुंबई महाजन नाम नहीं दिया बल्कि सपूर्ण सृष्टि के कल्याण के पवित्र भावना के साथ समस्त महाजन संस्था नाम दिया।  

विश्व के सभी अच्छे लोग एक अच्छी विचारधारा के साथ जुड़े।  इस भावना के साथ भगवान महावीर का संदेश है “सवी जीव करू शाशन रती” अर्थात सभी जीवों को जीने का अधिकार है भगवान महावीर के उपदेशो के अनुरूप हमने सभी प्राणियों एवं पंच महाभूतों जिनमे पृथ्वी , आकाश, वायु , जल, अग्नि, तथा प्रकृति यानी पर्यावरण की रक्षा ,सर्वधन को अपना ध्येय मानकर कार्य कर रहे है ; ताकि परमेश्वर प्रदत इस सृष्टि को अधिक सुंदर बनाया जा सके मेरा सभी अच्छे लोगो से यही आग्रह है कि वह एकजुट होकर अपनी पूरी ताकत से इस इश्वरी कार्य में सम्मिलित हो जाये और दुष्ट तामसिक पाशविक शक्तिओं को परास्त करे।  तभी यह संसार फिर से मंगल ग्राम बन पायेगा और यह दायित्व अच्छे सज्जन लोगो पर ही है।   

जैसे महावीरजी ने जल तत्व की बात की तो हमने गाँव – गाँव में तालाब, कुए, नदी- नाले आदि की पुनः व्यवस्था कर गाँववासियों को पानी के मामले में आत्म निर्भर बनाया। हमने यह अभियान चलाया की गाँव के प्रत्येक व्यक्ति 16  वृक्ष लगाए।  मान लो किसी गाँव ने 1 ,000  लोग रहते है  और वे सभी सोलह सोलह वृक्ष लगाते है।  तो कुल 16 ,000  वृक्ष गाँव में लग जायेगे।  ओर गाँव नंदनवन बन जायेगा।  इससे किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  हर गाँव हर व्यक्ति स्वावलंबी बने।  पैसे कमाने के लिए कही बाहर जाने की जरूरत नहीं है।  पहले हर गाँव में पशुपालन और कृषि व्यवस्था थी।  इससे उनकी आमदनी होती थी।  दूध, दही, धी, मख्खन एवं अनाज आदि के व्यापर से ग्रामीण लोग समृद्ध थे।  हम फिर से पुरानी ग्रामीण व्यवस्था को जीवंत करने के लिए काम कर रहे है और भगवान महावीर के विचारो को अपने सामाजिक कार्यो के माध्यम से जन – जन तक पहुंचा रहे है। 

देखिए , ऐसा है की भगवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि संकट के समय पीडितो की सेवा सहायता करनी चाहिए।  अभी भी हमें कोई पीड़ित व्यक्ति मिले तो हमसे जो भी यथायोग्य सेवा हो सकती है, वह करनी चाहिए।  प्राकृतिक आपदा की बात करे तो उस समय पशुपक्षी और मानव आदि सभी संकट में पड़ जाते है।  उनको बचाना तो सर्वश्रेष्ठ धर्म है।  हमने कश्मीर में बाढ़ आने पर वहा भी काम किया था।  हमने तब यह सोचा की वह कोई भी हो वह मानव है और प्राकृतिक आपदा के समय हमे  उनकी सहायता करनी चाहिए, यही हमारा धर्म हमें सिखाता है।  इसी भावना के साथ हमने केरल से लेकर नेपाल आदि सभी जगहों पर राहत कार्यो में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया ओर पीडितो को यथा संभव सहायता प्रदान की।  भगवान महावीर ने भी हमें यही सन्देश दिया है कि संकट के समय पीडित लोगो की मदद व सेवा करो.  हम उनकी ही प्रेरणा से यह सारे कार्य कर रहे है। 

हर लोग जो अध्ययन-मनन कर विवेकशील बनते है वह सभी महाजन ही है। सभी को अपनी परंपरा से जुड़ कर अपने – अपने क्षेत्र में अच्छे कार्य करने चहिये।  केवल बातो से ही नहीं काम  चलेगा।  हमें अब प्रेक्टिकल बनना पड़ेगा।  ग्राउंड लेवल पर हम छोटे छोटे कार्य करना चाहिए  जैसे 16 – 16  वृक्ष लगाकर अच्छे कार्य से जोड़  सकते है।  हम छोटा सा गढ्ढा खोद कर पानी रिसर्व कर सकते है।  हम गौचर, गौवंश की सेवा कर सकते है।  किसी  दीनहीन  जरूरियातमंद की सहायता कर सकते है।  ये सब अच्छे कार्य है।  सभी को करने चाहिए यह सब कार्य करके हम अपने जीवन में भी सुधार ला सकते है।  हम अपने आहार में भी सुधार ला सकते है।  हम क्यों होटल का खाना खाते है ? नहीं खाना चाहिए।  हम क्यों गन्दा खाना खाते है ? नहीं खाना चाहिए।  हमें सर्व प्रथम अपना कल्याण स्वयं करना चाहिए। हमें  पहले अपनी व्यवस्था सुधार कर अपने आस-पास के लोगो की सेवा करना चाहिए।   अगर आप बहुत ताकतवर बन जाये तो पूरे देश सहित विश्व कल्याण की भावना लेकर व्यापक काम करना चाहिए।  इसी से सभी का कल्याण होगा और भगवान महावीर के विचारो को हम साकार कर पाएंगे। ( @ लेखक भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड,भारत सरकार के सदस्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त संस्था-"समस्त महाजन" के मैनेजिंग ट्रस्टी है )

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महावीर जयंती के अवसर पर देशभर के वधशालाओं को बंद रखा जाय : गिरीश जयंतीलाल शाह

भगवान महावीर के "अहिंसा परमो धर्मः" का संदेश आज कितना जरूरी

5 अप्रैल, 2020 ; मुंबई (महाराष्ट्र) 5, 2020 • डॉ.आर. बी. चौधरी
आज समूचा विश्व कोरोना वायरस की जानलेवा भय से जूझ रहा है। चाइना जैसे वन्य जंतुओं को विनाश की कगार पर ले जाने वाला देश को समूची दुनिया कोस रही है। ऐसे परिपेक्ष में भारतीय संस्कृति, रीति-रिवाजों एवं जीवन शैली "अहिंसा परमो धर्म:" का संदेश बताने वाले भगवान महावीर की वाणी से दुनिया भर में सीख ली जाती है। इस महान संदेश को याद कर इस साल तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती 6 अप्रैल को मनाई जाएगी  किंतु आज के परिपेक्ष में भगवान महावीर के संदेश की पृथ्वी से मानवता बचाने के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इस बार का अंदाज लगाया जा सकता है।  भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य  एवं समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी ,गिरीश जयंतीलाल शाह  ने कहा कि हमारा देश  अपने सांस्कृतिक विरासत , ऋषि मुनियों के अहिंसा वादी संदेश , मर्यादाओं एवं संयम पर आधारित जीवन पद्धति सदैव समूची दुनिया को आकृष्ट करती रही है।  

उन्होंने  महावीर जयंती के अवसर पर भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी किए गए एडवाइजरी का  हवाला देते हुए बताया कि देश के महापुरुषों के जन्म दिवस के अवसर पर पशुओं का वध नहीं होना चाहिए और सभी राज्यों को इस एडवाइजरी का तत्काल प्रति पालन करना चाहिए। गिरीश जयंतीलाल शाह ने बताया कि भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सचिव डॉ एस के दत्ता के  द्वारा जारी  एक अनुरोध/ सर्कुलर के माध्यम से  देश के सभी जिलाधिकारियों  से यह अनुरोध किया गया है कि  महावीर जयंती या अन्य राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर देश के सभी वधशालाओं बंद रखा जाए. पत्र में यह भी अनुरोध किया गया है कि जिलाधिकारी/ राज्य सरकार स्थानीय निकायों  अथवा  प्राइवेट  निकाय द्वारा संचालित वधशालाओं को इस अवसर पर बंद रखा जाए।  पत्र में इस संबंध में तत्काल कार्यवाही करने की बात कही गई है और कहा गया है कि इस संबंध में किए गए कार्यवाही से अवगत कराया जाए। 

महावीर जयंती के अवसर पर उन्होंने अपने संदेश में देशभर के सभी पशु प्रेमियों,जीव दया के क्षेत्र में काम कर रहे कार्यकर्ताओं तथा सरकारी - गैर सरकारी प्रतिभागियों से अनुरोध किया है कि विश्व के सभी अच्छे लोग एक अच्छी विचारधारा के साथ जुड़े।  इस भावना के साथ भगवान महावीर का संदेश है “सवी जीव करू शाशन रती” अर्थात सभी जीवों को जीने का अधिकार है भगवान महावीर के उपदेशो के अनुरूप हमने सभी प्राणियों एवं पंच महाभूतों जिनमे पृथ्वी , आकाश, वायु , जल, अग्नि, तथा प्रकृति यानी पर्यावरण की रक्षा ,सर्वधन को अपना ध्येय मानकर कार्य कर रहे है ; ताकि परमेश्वर प्रदत इस सृष्टि को अधिक सुंदर बनाया जा सके मेरा सभी अच्छे लोगो से यही आग्रह है कि वह एकजुट होकर अपनी पूरी ताकत से इस इश्वरी कार्य में सम्मिलित हो जाये और दुष्ट तामसिक पाशविक शक्तिओं को परास्त करे।  तभी यह संसार फिर से मंगल ग्राम बन पायेगा और यह दायित्व अच्छे सज्जन लोगो पर ही है।  

उन्होंने भगवान महावीर के संदेश को याद दिलाते हुए कहा किजैसे महावीरजी ने जल तत्व की बात की तो हमने गाँव – गाँव में तालाब, कुए, नदी- नाले आदि की पुनः व्यवस्था कर गाँववासियों को पानी के मामले में आत्म निर्भर बनाया। हमने यह अभियान चलाया की गाँव के प्रत्येक व्यक्ति 16  वृक्ष लगाए।  मान लो किसी गाँव ने 1 ,000  लोग रहते है  और वे सभी सोलह सोलह वृक्ष लगाते है।  तो कुल 16 ,000  वृक्ष गाँव में लग जायेगे।  ओर गाँव नंदनवन बन जायेगा।  इससे किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  हर गाँव हर व्यक्ति स्वावलंबी बने।  पैसे कमाने के लिए कही बाहर जाने की जरूरत नहीं है।  पहले हर गाँव में पशुपालन और कृषि व्यवस्था थी।  इससे उनकी आमदनी होती थी।  दूध, दही, धी, मख्खन एवं अनाज आदि के व्यापर से ग्रामीण लोग समृद्ध थे।  हम फिर से पुरानी ग्रामीण व्यवस्था को जीवंत करने के लिए काम कर रहे है और भगवान महावीर के विचारो को अपने सामाजिक कार्यो के माध्यम से जन – जन तक पहुंचा रहे है। सभी को अपनी परंपरा से जुड़ कर अपने – अपने क्षेत्र में अच्छे कार्य करने चहिये।  केवल बातो से ही नहीं काम  चलेगा।  

हमें अब प्रेक्टिकल बनना पड़ेगा।  ग्राउंड लेवल पर हम छोटे छोटे कार्य करना चाहिए  जैसे 16 – 16  वृक्ष लगाकर अच्छे कार्य से जोड़  सकते है।  हम छोटा सा गढ्ढा खोद कर पानी रिसर्व कर सकते है।  हम गौचर, गौवंश की सेवा कर सकते है।  किसी  दीनहीन  जरूरियातमंद की सहायता कर सकते है।  ये सब अच्छे कार्य है।  सभी को करने चाहिए यह सब कार्य करके हम अपने जीवन में भी सुधार ला सकते है।  हम अपने आहार में भी सुधार ला सकते है।  हम क्यों होटल का खाना खाते है ? नहीं खाना चाहिए।  हम क्यों गन्दा खाना खाते है ? नहीं खाना चाहिए ।  भगवान  महावीर के सन्देश के अनुसार  हमें सर्व प्रथम अपना  कल्याण स्वयं करना चाहिए। हमें  पहले अपनी व्यवस्था सुधार कर अपने आसपास के लोगो की सेवा करना चाहिए।   अगर आप बहुत ताकतवर बन जाये तो पूरे देश सहित विश्व कल्याण की भावना लेकर व्यापक काम करना चाहिए ।  इसी से सभी का कल्याण होगा और भगवान महावीर के विचारो को हम साकार कर पाएंगे। 

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Saturday, 4 April 2020

फरीदाबाद की प्रीति दुबे कोरोनावायरस "कोविड-19" के दौरान बेसहारा जानवरों की बनी मसीहा , कहा-" बेसहारा पशुओं की प्राणरक्षा को भी लोग रोकते हैं"


फरीदाबाद (हरियाणा): डॉ.आर.बी.चौधरी    

फरीदाबाद की  युवा पशु प्रेमी  प्रीति दुबे कोरोनावायरस  कोविड-19 के नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा बंद केआवाहन के बाद नियमानुसार सड़क और गली कूचे के बेसहारा पशुओं को भोजन- पानी देने में जुटी हैं औरलोगों से अपील कर रही हैं कि लोग अपने पास पड़ोस के पशु पक्षियों को चारा - दाना देते देते रहें. उन्होंने  यह भी अनुरोध किया कि इस कार्य को कदापि बंद नहीं किया जाना चाहिए.  

प्रीति का कहना है कि इस पुण्य काम में तमाम लोग बाधा डालते हैं और उन्हें न तो जीव दया से कुछ लेना-देनाहै और ना ही धरती पर मौजूद पशु- पक्षियों, पेड़-पौधों और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए मानव अस्तित्व को बनाए रखने  रखने में  सभी का बराबर का योगदान है , ऐसे लोगों को इसका तनिक भी एहसास नहीं है. इस बारे में उनका कहना है कि लोगों में जागरूकता का अभाव है. सरकार द्वाराजन जागृति कार्यक्रम चलाने से लेकर इस दिशा में काम करने वाले लोगों को उत्साहित करने की अत्यंत आवश्यकता है. प्रीति पिछले एक दशक से जीव दया एवं पशु कल्याण के क्षेत्र में काम कर रही हैं . अपने निस्वार्थ  सेवा  और पशु प्रेम के वजह से  कैरियर बनाने के लिए सिविल सर्विस की तैयारी को छोड़कर पशु कल्याण को  जीवन का उद्देश्य बना लिया  है.

वर्तमान में  पीपल फॉर एनिमल्स नामक संस्था की एक इकाई चला रही हैं. इसके लिए उन्होंने अपने संघर्ष पूर्ण दिनचर्या से कई लोगों का दिल जीत लिया और लोगों से दान प्राप्त कर आज पशुओं के देखरेख, चिकित्सा एवं आकस्मिक सेवा की सुविधा के लिए एक शेल्टर भी बना लिया है. जहां पर एक क्लीनिक के साथ  एंबुलेंस की व्यवस्था करने में सफल  हो गई है .प्रीति अपने रोजाना के कार्यों का जिक्र करते हुए बताया कि हमारे देश में महिलाओं की एक तरफ बहुत इज्जत होती है. वेदों और पुराणों में भी मैं देवी - देवताओं के रूप में सम्मानित किया गया है. किंतु बेहद शिक्षित और पढ़े-लिखे आज के समाज में भी लोग महिलाओं की इज्जत नहीं करते और उनके द्वारा किए गए कार्यों में बाधा डालते- कई जगहों पर उन्हें पशुओं की प्राण रक्षा करने से  भी रोकते हैं, जो निहायत निंदनीय है और अमानवीय है.

पीपल फॉर एनिमल्स, फरीदाबाद  इकाई की संचालक प्रीति दुबे राज्य और केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि  जीव जंतु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960  के अनुसार पशु सेवा में लगे लोगों के कार्य में बाधा डालने वालों के प्रति सख्त कार्यवाही होनी चाहिए  और पशु कल्याण की दिशा में कार्यरत महिलाओं की आवाज  राज्य  एवं केंद्र सरकार द्वारा तत्काल सुनवाई की जानी चाहिए अन्यथा  "पशु सुरक्षा - पर्यावरण सुरक्षा" का वास्तविक उद्देश्य अपने लक्ष्य से भटक जाएगा. उन्होंने कोविड-19 से बचाव के दिशा में सरकार द्वारा जारी नियमों का प्रतिपादन करने एवं भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशन को मद्देनजर रखते हुए बेसहारा पशुओं को भोजन पानी देने की अपील की और कहा कि जितना संभव हो हर घर- हर परिवार अपने पास - पड़ोस के पशु पक्षियों को दाना -पानी देते रहें, यही हमारी धर्म और संस्कृति है जहां पग-पग पर इंसानियत का एक से एक बड़ा उदाहरण मिलेगा जिसकी समूची दुनिया कायल है.

प्रीति के उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए  भारत सरकार की ओर से उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार से  सम्मानित किया जा चुका है. इसके साथ साथ अब तक जीव दया एवं जीव रक्षा  दर्जनों सम्मान एवं प्रमाण पत्र के लिए प्रदान किया गया है. 

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कोरोना महामारी के पीडितों की सहायता के लिये आगे आइए : गिरीश जयंतीलाल शाह

समस्त महाजन का जैन समाज से विशेष आग्रह

2 अप्रैल 2020 ; मुंबई(महाराष्ट्र)

जैन समाज के लोग अधिकांशत  लोग विभिन्न प्रकार के व्यवसायों में जुड़े हुए हैं और साथ ही दया और करुणा के क्षेत्र  में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड,भारत सरकार के सदस्य एवं समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतीलाल शाह ने जैन समाज से आग्रह किया है कि कोरोना वायरस सेउत्पन्न संकट की परिस्तिथि में जैन समाज के दानवीर आगे आए और अपने देश की इस विपत्तिजनक स्थिति में अपने तन मन धन से किसी भी प्रकार की करोना महामारी के पीड़ितों की सहायता करें।

इस सिलसिले में  शाह ने बताया कि जैन समुदाय के मार्गदर्शको एवं आध्यात्मिक गुरुओ द्वारा  लगातार अनुरोध किया जा रहा है कि जैन समाज के सभी उद्योगपति ,श्रीसंघ एवं दानवीर अपना किसी न किसी रूप में मानवता दिखते हुए योगदान दे एवं देश की ,समाज की इस आकस्मिक चिंताजनक स्तिथि में सहायता करे। शाह यह भी बताया कि वर्तमान महामारी के इस विकट स्तिथि में जैन संघो , संस्थाओं और व्यक्तियों द्वारा जो भी प्राथमिक आवश्यकता और जीवन संसाधन के  किट्स की जरूरत है उसका वितरण शुरु कर दिया गया गया है और यह कार्य तब तक चलाया जाएगा जब तक इस विपदा पर नियंत्रण नहीं पा लिया जाता। 

ऐसी हालात में कोरोनावायरस से पीड़ित लोगों के लिए भोजन -पानी, सैनिटाइजर,मास्क,साबुन आदि का प्रबंध करने का आग्रह किया है। साथ ही साथ काम करने वाले कर्मचारियों को ऐसी परिस्थिति में  सभी से तनख्वाह आदि की व्यवस्था नियमित जारी रखने का अनुरोध किया जा रहा है। शाह ने जैन समाज से आग्रह किया है कि  सभी शहरों और गांवो में जो परिवारों की संघो, संस्थाओं, फाऊंडेशन, समाज द्वारा जो साधर्मिक भक्ति की जाती थी उसे चालू रखा जाय और ऐसी कठिन परिस्थिति में इन परिवारों का विशेष ध्यान रखने की जिम्मेदारी भी अच्छी तरह से निभायी जानी चाहिए।

जीवदया एवं पशु कल्याण के क्षेत्र में शाह ने अनुरोध करते हुए बताया कि गौशालाओं एवं पांजरापोल जैसी सभी संस्थाओं का भी ऐसी परिस्थिति  में विशेष ध्यान रखना अत्यंत जरुरी है ताकि जीव जंतुओं की सभी आवश्यक जरूरतों को पूरा किया जा सके । उन्होंने कहा सभी मानवतावादी लोगों को अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि पर दान के लिए विशेष ध्यान रखना चाहिये। जीवदया कार्य  में किए गए सभी कार्यों से हमारी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है जिससे समाजमें सुख- शांति आती है। इसलिए व्यक्तिगत से लेकर सरकार के प्रयास को सफल बनाने की परम आवश्यकता है।

शाह ने सभी मानवता वादियों से निवेदन किया कि दान दाताओं  द्वारा जो भी दान ईकट्ठा करें उसे विभाजित कर दान दें ताकि उसका उपयोग करके कोरोना वायरस से पीड़ितों की सहायता में ठीक ढंग से लगाया जा सके ।इस समय हमें अपना दान स्थान पर देने की बजाय उसे प्रधान मंत्री राहत फंड, मुख्य मंत्री राहत फंड एवं स्वयं सेवा कार्य में संलग्न संस्थाओं के माध्यम से दान देना चाहिए। हमें आज जीव दया ,गौ संरक्षण - संवर्धन के लिए गौशालाओं तथा पांजरापोलों अथवा अन्य जीव-जंतुओं के प्राण रक्षा के लिए दान देने की परम आवश्यकता है।

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Wednesday, 9 October 2019

डॉ.नीलम बाला,सचिव एडब्ल्यूबीआई को "यू.पी.रत्न-2019" अवार्ड


लखनऊ (उत्तर प्रदेश); 6 अक्टूबर 2019: डॉ. आर.बी. चौधरी

उत्तर प्रदेश की राजधानी  लखनऊ में आयोजित नेशनल इंटेलेक्चुअल  सोसाइटी के तत्वावधान में  एक   राष्ट्रीय  कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया  था जिसमें आयोजन समिति  ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया (एडब्ल्यूबीआई)  सचिव ,डॉ. नीलम बाला, सचिव -को  "यूपी रत्न - 2019"  अवार्ड से  सम्मानित किया.यह सम्मान पहली  बार उत्तर प्रदेश के किसी  महिला पशु चिकित्सक को उल्लेखनीय पशु चिकित्सा सेवा के लिए सम्मानित किया गया है.
  
यूपी आइकन अवार्ड, 2019 पशु चिकित्सा , अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और विकासात्मक गतिविधियों  पर  उनके समर्पित जीवन एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है। डॉ. बाला पशुचिकित्सा आनुवंशिकी और प्रजनन में विशेष  योग्यता रखने वाली महिला है  और एडब्ल्यूबीआई  इतिहास की पहली पशु चिकित्सक डॉक्टरेट- प्रशासक हैं। वर्तमान में डॉ. नीलम केंद्र सरकार में  गत 4अक्टूबर से  आगामी 4 वर्षों तक प्रतिनियुक्ति पर हैं। वह  केंद्रीय परियोजनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश  को सबसे समृद्ध बनाने के लिए पशु कल्याण पर  राज्य का समर्थन करने के लिए हमेशा आगे रहती हैं.  अभी कुछ दिन पूर्व के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ एक  बैठक में  उन्हें पशु कल्याण परियोजना के संचालन के मामले में बातचीत की तो मुख्यमंत्री ने उन्हें योजनाओं की सफलता के लिए पूर्ण समर्थन देने का वादा किया.

यहां यह बता दें कि डॉ. नीलम बाला उत्तर प्रदेश में पशुपालन विभाग में एक लोकप्रिय पशु चिकित्सक हैं. उत्तर प्रदेश में वह  विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं जैसे- एस्टेट ऑफिसर, नोडल ऑफिसर (ट्रेनिंग) और पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न समितियों के सदस्य के रूप में  भी  काम किया है और उन्होंने सोडिक लैंड प्रोजेक्ट- III, एक विश्व बैंक परियोजना के आजीविका  सहयोग एवं समर्थन उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.  वैसे डॉ. बाला हरियाणा में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से पशु चिकित्सा ग्रैजुएट एवं पोस्ट ग्रैजुएट होने के साथ-साथ उसी विश्वविद्यालय से  पशु आनुवंशिकी और प्रजनन में पीएच.डी. है. वह आईआईएम, आईवीआरआई, एमएएनएजीइ, एनआईडीएम, डब्लूआईआई,  आईएएसआरआई,एनआईआरडी, सीपीडीओ में सामान्य प्रबंधन, शासन और पशु चिकित्सा विज्ञान और पशु कल्याण से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी हैं. दुनिया भर में प्रकाशित होने वाले कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शोध प्रकाशनों में उनके शोध पत्र प्रकाशित हैं.  साथ ही साथ पशु स्वास्थ्य पर प्रशिक्षण कार्यक्रम पर आयोजित कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी फोर्ट कोलिन्स में भारत का प्रतिनिधित्व  भी कर चुकी हैं. ’इंटरनेशनल वन हेल्थ कांग्रेस मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में पेपर प्रस्तुत किया है.

वह आइएएवीआर, आईएसवीयम, आईएसएजीबी, एलएसएआई सहित पशु विज्ञान से संबंधित कई संघों की सदस्य हैं. वह कई पत्रिकाओं के समीक्षक और कार्यकारी सदस्य भी हैं. वह सीडीआरआई, आईआईटीआर, एनबीआरआई सहित कई संस्थाओं की  सीपीसीएसईए  की नॉमिनी भी हैं. डॉ. नीलम बाला को उनके योगदान के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित किया गया है जिनमें से एक उल्लेखनीय महिला वेटरिनरी अवार्ड, सुल्तान अवार्ड, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम उत्कृष्टता पुरस्कार, राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार, युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति भी प्राप्त कर चुकी है.

डॉ. नीलम बाला विशेष रूप से निराश्रित जानवरों की बेहतर देख-भाल के लिए पशु कल्याण और उत्पन्न होने वाले अपराधों निवारण के लिए प्रयासरत हैं. वह सरकार, पशु प्रेमियों और जनता के बीच  जानवरों की देखभाल के एक सेतु निर्माण करने के लिए कार्यरत तथा देश में पशु क्रूरता निवारण के साथ साथ पशु कल्याण में महिला सशक्तिकरण के लिए बहुत उत्सुक है.अभी हाल में  नॉर्वे के बर्गन में आयोजित  होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था जहां पर  पशु कल्याण विषय पर उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया है.


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Wednesday, 2 October 2019

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने आम आदमी से सीधे संवाद हेतु वेबसाइट का लोकार्पण किया


हाइलाइट्स:

# उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गांधी के ग्राम स्वराज का सपना साकार करेगा उत्तर प्रदेश.

# उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि गांधी जी और शाष्त्री जी की भावना का सम्मान स्वच्छता में योगदान और प्लास्टिक का बहिष्कार करके किया जा सकता है.

# आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर श्यामनंदन सिंह ने कहा कि गोसेवा आयोग की नवीनतम वेबसाइट से गोपालक अब ऑनलाइन अनुदान के लिए आवेदन कर सकेंगे.

डॉ. आर. बी. चौधरी
 2 अक्टूबर, 2019; लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

महात्मा गांधी की 151वीं जयंति पर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने जनता को उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग की नवीनतम वेबसाइट का अनावरण गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर शहीद पथ पर स्थित अवध शिल्पग्राम में एक उत्पाद एक योजना के 10 दिवसीय प्रदर्शनी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के किसानों को खुशहाल बनाने और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए संकल्पबद्ध है। राज्य सरकार के सभी विभाग बापू के ग्राम स्वराज को साकार करने के लिए हर सम्भव कार्य कर रहे हैं।

इस अवसर पर आयोजन की मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ढाई साल के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने अनेक योजनाओं के माध्यम से इतना काम किया है जितना पिछले 15 साल में भी नहीं हुआ। महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शाष्त्री की जयंति पर उनके सपने को साकार करने के लिए स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने में हमें हर संभव योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर पंचायती राज विभाग, लघु उद्यम और खादी ग्रामोद्योग विभाग की कई योजनाओं के तहत श्रमिकों और उद्यमियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों को अब लोन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। महज 59 मिनट में लोन की सारी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।इस आयोजन में मंच पर लघु उद्यम मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, खादी ग्रामोद्योग मंत्री चौधरी उदयभान, संस्कृति और पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी, मुख्य सचिव आर के तिवारी, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम नंदन सिंह, उपाध्यक्ष यशवन्त सिंह भी मौजूद थे।

उ.प्र गो सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर श्याम नन्दन सिंह ने बताया कि आयोग की नवीन वेबसाइट गो संरक्षण और संवर्धन के सम्बंध में सभी प्रकार के नवीन जानकारियां उपलब्ध हैं। उ.प्र. में आयोग देशी नस्ल के गोवंश के संरक्षण की दिशा में गोपालकों और गोशालाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी वेबसाइट में उपलब्ध करवाई गई है। इस वेबसाइट से सभी प्रकार की सरकारी योजनाओं, पंजीकृत गोशालाओं, सभी प्रकार के गोवंश की नस्लों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस वेबसाइट में अद्यतन उपलब्ध सभी अनुदेश, शासनादेश और योजनाओं का विवरण सुलभ है।प्रदेश भर में गो सेवा अश्रय स्थल, गोशालाओं या सरकारी विभागों से सम्बंधित किसी प्रकार की शिकायत भी ऑनलाइन करने की सुविधा वेबसाइट में उपलब्ध है। गोपालक उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग से सम्बन्धित सभी जानकारी upgosevaayog.in/ upgosvaayog.upsdc.gov.in पर हासिल की जा सकती है।

वेबसाइट के अनावरण के अवसर पर आयोग के सदस्य कृष्ण कुमार सिंह ‘भोले सिंह’, विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सौरभ मिश्रा, गोवंश के संरक्षण और गोपालकों की आर्थिक स्थिति को सुधार के लिए नवाचारी प्रयास करने वाले विशेषज्ञों में डॉ. आनंद कुमार, डॉ. प्रतीक सचान, डॉ. संजय यादव, डॉ गंगवार, डॉ प्रमोद कुमार त्रिपाठी, डॉ उमाशंकर श्रीवास्तव, अमित आनंद, चन्दर कुमार, सुनील शाक्य, सुनील मिश्रा सहित आयोग से सम्बद्ध विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग उद्यान विभाग, उद्यमिता विभाग, वैज्ञानिक, गोपालक, गो प्रेमी और अनेक संबधित विभागों के अधिकारी और भारी संख्या में पशु प्रेमी गोपालक तथा लखनऊ शहर के निवासी  मौजूद थे।

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Tuesday, 18 June 2019

तमिलनाडु में एक चैरिटेबल ट्रस्ट ने ग्रामीणों के लिए पशु अस्पताल खुला

 बेसहारा पशु, ग्रामीण पशुपालक, पशु प्रेमी और और किसान लाभान्वित होंगे: डॉक्टर ओ.पी. चौधरी

19 जून, 2019; चेन्नई (तमिलनाडु)



 

देश में पशु चिकित्सक और पशु अस्पताल पालतू और बेसहारा जानवरों की उचित देखभाल और उनके रख-रखाव के लिए विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) पशु शरण स्थल आधारित पशु चिकित्सा केंद्रों को स्थापित करने के लिए  पशु सेवा में लीन  संस्थाओं को सहायता करने एवं प्रोत्साहन का कार्य कर रहा है। वर्ष 2019 के दौरान, बोर्ड पशु कल्याण संगठनों को दूर-दराज और ग्रामीण इलाको में पशु चिकित्सा केंद्रों को स्थापित करने के लिए प्रेरित करने में सफल रहा है। इस श्रृंखला में हरियाणा राज्य के बाद, तमिलनाडु  अब दूसरा राज्य है जहां बोर्ड  द्वारा मान्यता प्रदत्त एक  पशु कल्याण संगठन ने पशु अस्पताल खुलवाया है, जिसमें बेसहारा, घायल ,अपाहिज, बूढे  और असमर्थ जानवरों की  पशु चिकित्सा सेवा  मुहैया कराई जाएगी। इस अस्पताल का शुभारंभ भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव द्वारा किया गया है। बोर्ड अध्यक्ष, डॉ. ओ.पी. चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में पशु अस्पतालों की स्थापना से पशुओं के स्वास्थ्य का लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ  को देख कर अन्य पशु कल्याण कार्यकर्ताओं और पशु कल्याण संगठनों को प्रेरणा मिलेगी ।

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव (एनएलएम और एडब्ल्यू),डॉ. ओ.पी. चौधरी  जो वर्तमान में भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं,ने कहा कि  "जीवकरुण्य पशु कल्याण धर्मार्थ ट्रस्ट - पशु अस्पताल और बचाव केंद्र" नाम की तमिलनाडु में पशु कल्याण संस्था बेसहारा एवं निराश्रित  पशु पक्षियों के लिए अच्छा कार्य कर रहा है। इस अस्पताल से स्थानीय पशुओं की बेहतर सेवा हो सकेगी। साथ ही अस्पताल  के बेहतरीन सेवा से पशु कल्याण गतिविधियों  में इजाफा होगा  जो पशुओं पर होने वाले अत्याचार को रोकने में नितांत सहायक होगा।  डॉक्टर चौधरी ने कहा कि  उनको बहुत बड़ी उम्मीद है  के तमिलनाडु  के कन्याकुमारी  जनपद में स्थापित यह ग्रामीण अस्पताल निस्वार्थ भाव से पशुओं की बेहतर सेवा कर उनकी जान बचाने के लिए हर पल समर्पित रहेगी। अस्पताल की स्थापना की सफलता  में निश्चित रूप से  वहां के  दयावान  और अत्यंत सहयोगी प्रवृत्ति के  लोगों का  बहुत बड़ा हाथ है। वहां के लोगों की भावना का  प्रभाव पूरे देश में जाएगा और लोगों को जागरूक करेगा जिससे जानवरों पर क्रूरता को रोकने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड  सभी पशु कल्याण संगठनों और गोशालाओं को  पशु शरण स्थल आधारित पशु चिकित्सालय स्थापित कर  निराश्रित पशु जैसे मवेशी, कुत्ते, बिल्ली और अन्य जानवरों की देखभाल और प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। बोर्ड  का  हमेशा प्रयास रहा है कि  पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम संचालित कर  कैनाइन  प्रजाति के पशुओं की आबादी नियंत्रण किया जाना अत्यंत आवश्यक है जिसके लिए बोर्ड निरंतर कटिबद्ध है।  इस दिशा में छुट्टा पशुओं( कुत्तों) के जनसंख्या नियंत्रण  तथा  रेबीज-रोधी कार्यक्रम के  सफल संचालन, पशुओं के रेस्क्यू कार्यों को करने के लिए बोर्ड संस्थाओं को एम्बुलेंस सुविधाएं प्रदान करता है।

इस परिपेक्ष में  बोर्ड सचिव डॉक्टर नीलम बाला ने तमिलनाडु के नागरकोइल जिले के स्थानीय लोगों और ग्रामीणों की सराहना  किया और कहा कि इस तरह की स्थापना के सफलता के पीछे  नागरकोइल के  लोगों की प्रशंसा की जानी चाहिए क्योंकि बिना उनके सहयोग और समर्थन के इतना बड़ा कार्य नहीं किया जा सकता है। उसने कहा कि "जीवकारुन्या  एनिमल वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट - एनिमल एंड रेस्क्यू सेंटर" वास्तव में जैसा नाम "जीवकारुन्या"  उसी तरह का कार्य सुनिश्चित किया है। बेशक इसका असर  पड़ेगा  और संस्था सभी जीवों के प्रति दया या करुणा को वहां के  लोगो में प्रसारित करने में सफल होगी। बोर्ड इस तरह से समर्पित संस्थाओं को अभी प्रेरित कर रहा है  और देश भर की संस्थाओं को पशु शरण स्थल आधारित पशु चिकित्सालय स्थापित करने के लिए आवाहन करता है। सचिव ने बताया कि इस तरह के काम करने वाले लोगों को बोर्ड हमेशा उत्साहित करता रहा है और आज भी।  यही कारण है कि बोर्ड पशु कल्याण के सही मार्ग  पर चलने  वाले संस्थाओं के लिए  आज आगे आया है। सचिव ने  संस्था के संस्थापक के उद्देश्यों  की सराहना की और कहा कि इस अस्पताल की संस्थापक,  डॉक्टर वसंता लक्ष्मी रवि कुमार  सभी जानवरों के प्रति अत्यंत दयावान है  जिसका नतीजा है कि आज यह पशु अस्पताल हमारे सामने है। सचिव ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को याद दिलाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों में पशु की क्रूरता को रोकने के लिए (पीसीए) अधिनियम, 1960 के प्रावधानों का उल्लेख किया है जिसमें उनके"पांच प्रकार कीअधिकारो" के मानदंडों  का विवरण है।साथ- साथ  यह कहा  कि नियमानुसार पशु कल्याण मानदंडों को लागू कर जानवरों पर  होने वाले क्रूरता तथा अपराध को रोकने का कार्य कर उनकी देखभाल करके सभी कल्याण कार्यक्रम चलाए जाएं ।

बोर्ड के अध्यक्ष के इस यात्रा के दौरान  कन्याकुमारी जिला प्रशासन से पशु कल्याण के उपायों और  संबंधित नियमों के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए  कार्य करने के लिए प्रेरित किया ।  जिला प्रशासन ने इस संबंध में संबंधित विभागों की एक समीक्षा बैठक  भी आयोजित की। बोर्ड अध्यक्ष ने जिला प्रशासन को  यह भी निर्देश दिया कि नियमों के अनुसार एसपीसीए, कन्याकुमारी के कार्यान्वन के लिए उचित ध्यान दें।   कन्याकुमारी के जिला जिलाधिकारी, प्रशांत एम. वडनेरे ने  एसपीसीए अर्थात सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूलेटरी टू एनिमल्स के उचित कामकाज के लिए आश्वासन दिया।

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Rural Animal Welfare Workers and Farmers Will Be Benefited: Dr. O. P. Chaudhary

Tamilnadu Based  Charitable Trust  Opened Animal Hospital  for Villages


19th June,2019 ; Chennai (Tamilnadu)

Veterinarians and animal hospital  in the country  is suffering from various challenges  for the proper care and management of  domesticated and  stray animals. The Animal welfare Board of

India (AWBI) encourages  and provides support to set up animal Care Centres . During the year 2019 , the Board  has succeed to motivate  animal welfare organisations to setup veterinary hospitals  in  remote and rural areas .In this series , after  Haryana , Tamilnadu is the  Second State  where  rural veterinary hospital is  opened  by AWBI recognized animal welfare organization for the service of homeless animals. This hospital is  inaugurated by the Chairman of the Animal Welfare Board of India  and it's  Secretary. The AWBI Chairman , Dr. O.P. Chaudhary  said that  the establishment of the veterinary hospitals in rural area  will boost the the animal health and farmers productivity.  Such activities will inspire the  other animal welfare activists and animal welfare organisations too.

Dr. O.P. Chaudhary, Joint Secretary(NLM & AW), Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying , Government of India  said that this organisation- "Jeevakarunya Animal Welfare Charitable Trust - Animal Hospital and Rescue Centre" is doing tremendous work for homeless ,uncared animal and this hospital will be helpful in terms of animal welfare activities in the time to come.He hoped for better service and activities of  animal welfare will be carried out in selfless manner to save their life. He said that these activities  will certainly will make more  aware the public  to be more kind and compassionate  which will help to prevent the cruelty on animals. He also said taht the AWBI provides financial support to animal welfare organisations and goshalas for construction of shelters,  care and management of stray animals  like cattle , dogs , cats  and other animals.The  Board also supports Animal Birth Control(ABC) Programme for canines towards population control of  stray animals. For care of  animal health and rescue operations , the Board provides ambulance  facilities.

Appreciating the local people and villagers of the Nagarcoil district of Tamilnadu, Dr. Neelam Bala, Secretary of the Board  said that  without the cooperation and support such kind of establishment cannot be done. She said that   "Jeevakarunya Animal Welfare Charitable Trust - Animal Hospital and Rescue Centre" is  truly named "Jeevakarunya" which defines its virtues - the kindness or  compassion to all the living creatures. The Board supports all the  animal welfare organisations throughout country.The Board has come  forward to support organisations  working in this manner and follow the right path of animal welfare.

She has appreciated  the aims and objectives of Dr.T. Vasantha Lakshmi Ravi Kumar, Chairperson of the Hospital and said that  this Hospital is established due to her nature of kindness  and compassion to all animals. Secretary has recalled  the directions of the Supreme Court of India wherein mentioned the  provisions of the Prevention of Cruelty to Animals(PCA) Act 1960  to prevent the  cruelities on animals  by implementing the animal welfare norms  stated  under criteria of the " Five Freedom" of animal welfare for their care and concern.

During the visit of the Chairperson of the  Board ,  the district administration  arranged a meeting of the departments concerned  to ensure the the implementation of the  animal welfare measures  and the rules. The Chairman AWBI  directed the district administration to pay the proper attention  for the functioning of the SPCA , Kanyakumari  as per rules and District Magistrate, Shri Prashant M. Wadnere assured for proper functioning of Society for Prevention of Crulety to Animals.

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Monday, 17 June 2019

देश में रक्तदान की जागरूकता आवश्यक:डॉ.वल्लभभाई कथीरिया


राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के चेयरमैन ने 127वीं बार रक्तदान  किया  

17 जून 2019,नई दिल्ली

"वर्ल्ड ब्लड डोनर डे, 2019" के उपलक्ष्य में राजकोट सिविल हॉस्पिटल पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज में  इंडियन मेडिकल एसोशिएशन के तत्वाधान में बेसहारा और थैलेसेमिया पीड़ित बच्चों के लाभार्थ हुई 'रकतदान शिबिर' में अपने जीवन का 127 वा रक्तदान किया . देश के अग्रणीय रक्तदाता, भारत सरकार के राष्ट्रीय कामधेनु आयोग क़े चेरमेन ,पूर्व केंद्रीय मंत्री ,  डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने 'विश्व रक्तदाता दिन' के उपलक्ष्य में इंडियन मेडिकल एसोशिएशन के तत्वाधान में राजकोट सिविल हॉस्पिटल में पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज में  'रकतदान शिविर' में शामिल होकर अपने जीवन का 127वा रक्तदान किया.उन्होंने बताया कि बच्चे के जन्म के समय महिलाओं ,थैलेसीमिया ,एनीमिया ,लंबी अवधि के ऑपरेशन तथा एक्सीडेंटल ऑपरेशनमैं रक्तदान से लोगों काजीवन बचाया जा सकता है.

डॉ.कथीरिया ने अपने जीवन का प्रथम रक्तदान एमजी साइंस कॉलेज के एनसीसी केडेट्स द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदान किया.डॉ. कथीरिया बताया कि रक्तदान करना बहुत ही सरल,सहज है और सिर्फ मिनिट्स में ही आप अपना पूर्ववर्त रूटीन शुरू कर सकते है और रक्तदान करना  स्वास्थय के लिए भी उत्तम है. साथ -साथ रक्तदान से मौत से जूझ रहे किसी इंसान की जिंदगी बचाई जा सकती है.कोई भी 18 से 60 वर्ष का व्यक्ति रक्तदान कर सकता है.उन्होंने बताया किएक सामान्य मनुष्य केशरीर में 7 से 8 लीटर ब्लड होता हैजिसमें से 380 मिलीलीटर रक्त का दान करने में कोई नुकसान नहीं है.हम जब रक्तदान करते हैं तो उसके बाद तक घंटे भीतर ट्रिनिटीज के जरिए रिजर्व रक्त से कमी की भरपाई हो जाती है.इसलिए रक्तदान से किसी प्रकार की शरीर में कमजोरी नहीं आती है. डॉ.कथीरिया ने बताया कि भारत में जागरूकता का अभाव होने की वजह से प्रति 1000 व्यक्तियों में कोई 7 लोग रक्तदान करते हैं जब कि विकसित देशों में प्रति 1000 व्यक्तियों में 60 से 70 लोग रक्तदान करते हैं.

डॉ. कथीरिया ने बताया कि रक्तदान यात्रा का शुभारंभ तो  पहले से चल रहा था किंतु जब वह 11वे रक्तदान के बाद तत्कालीन राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए गए तो उससे उन्हें काफी प्रोत्साहन मिला मिला. बतौर सर्जन , जब वह डॉ. वी. जी. मावलंकर जैसे प्रख्यात लोगों के साथ कार्य करते हुए जीवन रक्षा के अनेक चुनौतियों का सामना कर जीवन रक्षा करने का संतोष प्राप्त किया और उसे से जीवन में निरंतर रक्तदान जारी रखने कासंकल्प लिया. शुरू में तो सैकड़े  का लक्ष्य रखा जो वर्ष 2002 मैं पूरा हो गया.फिर मन की शक्ति फिर से मजबूत हुई और इस पावन पथ को सार्वजनिक स्वरूप देते हुए रक्तदान का महोत्सव जैसा आयोजन करने लगे .यह कारवां चलता गया - हम आगे बढ़ते गए.राज्यपाल सुंदरसिंह भण्डारी जी के विशेष प्रेरणा से इस अभियान के शुरुआत में महज 1000 रक्तदाताओं का लक्ष्य रखा गया  था लेकिन रक्त दाताओं के अपार उत्साह से यह आंकड़ा 7644 पर जा पहुंचा. यहां तक स्थिति आ गई कि ब्लड बैंक की क्षमता पूर्ण हो जाने के कारण तकरीबन 3000  लोगों को वापस जाना पड़ा.

मुझे वह समय याद है जब मेरे व्यक्तिगत 108वे रक्तदान के समय मेरे दिल्ली के मित्रों ने यह पावन आयोजन अक्षरधाम मंदिर में किया जहां योगगुरु बाबा रामदेव के साथ 2775 रक्त दाताओं ने अपना योगदान दिया.इसी प्रकार मेरे 125वा रक्तदान राजकोट में और 126वा रक्तदान स्वामीनारायण धर्मोत्सव में किया जो अत्यंत उत्साहवर्धक था.उन्होंने कहा कि मैं आज बहुत खुश हूं जब इस साल आयोजित होने वाले "वर्ल्ड ब्लड डोनर डे, 2019" के अवसर पर इंडियन मेडिकल एससोसिएशन द्वारा आयोजित रक्तदान केम्प में 127वा रक्तदान का भी लक्ष्य पूरा किया. डॉ. कथीरिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अभी तक के सार्वजनिक जीवन के दौरान हज़ारो रक्तदाताओ को प्रोत्साहित करने ,सैकड़ों रक्तदान केम्प आयोजित करने -करवाने तथा अनगिनत  ब्लड बैंको की स्थापना करवाने का ईश्वर ने मौका प्रदान किया जो मेरा सौभाग्य है. डॉ. कथीरिया रक्तदान सेवा को अपने जीवन की एक बहुत बड़ी मानव सेवा की सफलता मानते है.

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Tuesday, 11 June 2019

पशु -पक्षी प्रिय वृक्ष लगाइए धरती बचाइए- शहरों में वृक्षारोपण से अपराध घटेंगे- सोच सकारात्मक एवं धार्मिक होगी - लोगों की खुशहाली और उम्र बढ़ेगी : भिखारी प्रजापति

पीकेएनबी संवादसूत्र : 11 जून 2019 गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)

आज ऑर. डी. एनिमल वेलफेयर  फाउंडेशन के तत्वाधान में  एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का  शुभारंभ किया गया।  वृक्षों की भूमिका पर विश्व हिंदू महासंघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष भिखारी प्रजापति  मुख्य अतिथि के रूप में  एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहां कि आज के परिपेक्ष में वृक्षारोपण बेहद जरूरी है, खास करके पशु पक्षियों के पसंदीदा  वृक्षों की। वृक्षों की भूमिका बताते हुए सभी से आग्रह किया कि अधिक से अधिक अपने आस-पास  पेड़-पौधे लगाइए। इससे प्राप्त शुद्ध हवा सकारात्मक विचार देगी और उससे ऊर्जा मिलेगी  जिससे हमारा तनाव कम होगा। इतने ही नहीं हमारे आपसी कलह -झगड़े और  विवाद या  क्राइम की  घटनाएं कम होती हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के बाद विश्व हिंदू महासंघ  के जिम्मेदारियों को बखूबी से निभाने वाले  भिखारी प्रजापति  पेशे  से शिक्षक हैं। इसलिए उनकी  ईमानदारी,सादगी और शालीनता अत्यंत चर्चित है। यही कारण है कि वर्तमान में अध्यक्ष की  गरिमामय भूमिका अभी तक निभा रहे हैं।  मुख्य अतिथि के रूप में  उन्होंने  सबसे पहले वृक्षारोपण का शुभारंभ किया और दूर- दूर से आए पशु  प्रेमियों , पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाले कार्यकर्ताओं तथा विश्व हिंदू महासंघ के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि  हमारे पौराणिक ग्रंथों में वृक्षों की  महिमा का विधिवत वर्णन किया गया है और यही कारण है कि आज भी तमाम ऐसे वृक्ष है जिनकी हम पूजा करते हैं।  पौराणिक मान्यता की पुष्टि करते हुए उन्होंने बताया कि एक वृक्ष लगभग 48 पाउंड कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करता और 260 पौंड ऑक्सीजन छोड़ता है। उन्होंने आगे बताया कि प्रतिवर्ष भारत में 12,000 लोग लू और तपिश का शिकार होते हैं जो निरंतर बढ़ती जा रही है।जब एक वृक्ष 10 मीटर के परिधि में ऑक्सीजन छोड़ता तथा ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण को सोखता है तू हमारे आसपास का वातावरण ठंडा रहता है। अगर हम अपना जीवन हरियाली के बीच में व्यतीत करें तो हमारी उम्र में 7 साल का इजाफा हो जाएगा।  उन्होंने सीता मैया का उदाहरण देते हुए कहा कि सीता माता अशोक वृक्ष के नीचे  बैठकर अपने मन पीड़ा को सहने शक्ति जुटती थी ।

ऑर. डी. एनिमल वेलफेयर  फाउंडेशन  के इस कार्यक्रम में लखनऊ से पधारे उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के उपाध्यक्ष अश्वनी त्रिपाठी विशेष अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कहा कि वृक्षारोपण आज की आवश्यकता बन गई है किंतु वृक्षारोपण का महत्व समझना समझाना कोई नई बात नहीं है।  इसका इतिहास हमारे धर्म ज्ञान- विज्ञान से जुड़ा हुआ है जिसे हमारे पूर्वज अपने अनुभव और ज्ञान से कल्पवृक्ष की खोज की थी और उसे आज विज्ञानकी कसौटी पर खरा पाते हैं। त्रिपाठी ने पशु-पक्षियों की दुर्दशा और पर्यावरण प्रदूषण से होने वाले घातक असर की चर्चा की।

कार्यक्रम के आयोजक एवं विश्व हिंदू महासंघ कार्यकारिणी के सदस्य रामानुज सिंह-भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड भारत सरकार के मानद जिला जीव जंतु कल्याण अधिकारी (गाजियाबाद) ने कहा कि वृक्षारोपण का कार्यक्रम अब चल पड़ा है और चलता ही रहेगा।उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू महासभा का "ग्रीन गाजियाबाद" का अभियान अपनी मंजिल परअवश्य पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में 1,000 से अधिक कार्यकर्ता शामिल हुए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "गौ संरक्षण-पर्यावरण रक्षण-जीवन रक्षण" नीति उत्तर प्रदेश में एक नई क्रांति ला रही है। उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री के जन प्रेम का नतीजा हम हाल में हुए पार्लियामेंट चुनाव के दौरान भली-भांति  देख चुके हैं ।

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Monday, 10 June 2019

रांची की सोनाली एवं नील मजूमदार अब पिल्ले नहीं बेचेंगी - उनका लालन-पालन करेंगी विदेशी स्वान प्रजनन का व्यवसाय छोड़ कर अब गली कूचे के श्वानों के साथ जुड़ गई

ए.डब्लू. संवादसूत्र  : 10 जून 2019 रांची (झारखंड)


डॉ. शिवानंद काशी नोडल पदाधिकारी- राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड झारखंड ने बताया कि  झारखंड राज्य में प्रशिक्षण एवं जागरूकता का विशेष अभियान चलाया जा रहा है और लोगों में बड़ी तेजी के साथ जागरूकता आ रही है।उन्होंने बताया कि  शहर में स्थित  पशु कल्याण संस्था  "हेवन ऑफ जीसस एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट" शुरू में स्वान प्रजनन का कार्य कर रहा था  किंतु पशु कल्याण कार्यों से प्रभावित होकर के अब पशुओं की प्राण रक्षा करने तथा पशु शरण स्थल पर लाकर उनकी सेवा-श्रुषा मे लिन हो गया है। पशु प्रेमियों में इस बदलाव का खूब चर्चा हो रही है।

डॉ. शिवानंद काशी ने बताया कि  अब लोग पशु कल्याण के लिए खुलकर के सामने आ रहे हैं जो एक शुभ संकेत है। "हेवन ऑफ जीसस एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट" के इस बदलाव से कामकाज करने के तरीके बदल गए हैं।ट्रस्ट ने  कल  श्वानों में जन्म दर नियंत्रण कार्यक्रम का शिविर लगाया जिसमें 14 नर  और 26 मादा  अर्थात कुल 40 श्वानों की नसबंदी की गई।  डाक्टर शिवानंद काशी इस कार्यक्रम से अत्यंत प्रभावित है और उनका मानना है कि पूरे प्रदेश में स्वान जन्म दर नियंत्रण कार्यक्रम सफलतापूर्वक लागू किया जाएगा।  डॉक्टर शिवानंद काशी ने यह भी अवगत कराया कि "हेवन ऑफ जीसस एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट" के इस महत्वपूर्ण निर्णय और निस्वार्थ सेवा को देख कर के  राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड झारखंड ने  भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड से मान्यता प्राप्त करने की सिफारिश की है ताकि संस्था को नियमित मार्गदर्शन एवं सहायता मिलना आरंभ हो जाए। संस्था की ओर से निल मजूमदार  ने सभी  पशु चिकित्सकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।  उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के अनेक समर्पित पशु प्रेमी अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं जिसमें हरीश दानानी , गौरव ,अनिता आदित्य और धीरज  स्वान बंधारण कार्यक्रम में अपना योगदान दिए हैं।  नील मजूमदार को भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के मार्गदर्शन एवं सहयोग की विशेष आशा और भरोसा है।डॉ. शिवानंद काशी ने यह भी बताया कि झारखंड पशु चिकित्सा संघ के संगठन मंत्री डॉ धर्म रक्षित विद्यार्थी का अमूल्य योगदान मिल रहा है। 

इस कार्यक्रम को  प्रसारित करने के लिए  अभी कुछ दिन पहले राज्य पशु चिकित्सा अधिकारियों के एक निरीक्षण दल  द्वारा हटिया में स्थित "अभीराज केनेल का  अचानक निरीक्षण किया।  जिसके तहत प्रत्येक प्रजनक (ब्रीडर) को  यह आगाह कराया गया कि राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड झारखंड से निबंधन  अत्यंत आवश्यक है  और कोई भी  स्वान प्रजनक खुलेआम बिक्री नहीं कर सकता क्योंकि कुत्तों का प्रजनन और पिल्लो का विक्रय  बिना निबंधन के अवैधानिक है। निबंधन के लिए हर प्रजनक को ₹5000  आवेदन शुल्क जमा करना होगा।  कानून का उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर अवैध प्रजनक श्वानों को जप्त कर लिया जाएगा। साथ ही  साथ  ट्रायल के दौरान स्वान पशु के भरण-पोषण चिकित्सा परिवहन बंध्याकरण इत्यादि   का ब्यय  स्वान स्वामी द्वारा वसूला जाएगा। आगे अभी बताया गया कि  स्वान प्रजनन  की न्यूनतम 1.5 वर्ष तथा अधिकतम 8 वर्ष आयु  निर्धारित की गई है। मादा स्वान  से 1 साल में एक तथा पूरे जीवन में 5 बार ही बार प्रजनन की अनुमति  निर्धारित की गई है। निरीक्षण समिति में डॉ. दयानंद प्रसाद,डॉ स्टैनली कुजुर एवं डॉ पुष्पांजलि शामिल थी।

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Sunday, 9 June 2019

लखनऊ शहर में घोड़ा - गाड़ी चालकों के लिए जांच अभियान - दोषी चालकों को हिदायत - चाबुक छीने गए

रिपोर्ट : डॉ. आर. बी. चौधरी

9 जून 2019 ; लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

इस वर्ष गर्मी की मार इतनी तेज है कि  समूचे देश में पशु -पक्षियों की हालात बहुत खराब है।  राजस्थान, महाराष्ट्र तथा गुजरात जैसे तमाम राज्यों में अकाल की भयावह स्थिति बनी हुई है।  हर गांव से प्रतिदिन चारे -पानी के अभाव में पशुओं की मरने की खबर एक आम बात हो गई है। कई राज्यों में जीव जंतु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के अंतर्गत उल्लेखित उपायों के तहत चिलचिलाती गर्मी में पशुओं से काम लेना एक अपराध है और इस बात को नजर रखते हुए कई राज्यों में राज्य प्रशासन या जिला प्रशासन/जिलाधिकारी  ने चिलचिलाती धूप में पशुओं से काम लेने पर प्रतिबंध लगाया है।साथ ही साथ  पशुओं के उपयोग का समय निर्धारित किया गया है और उनके लिए चारा- दाना प्रबंधन की व्यवस्था का भी आदेश दिया है।  इसी क्रम में  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सोसायटी फ़ार  एनिमल वेलफेयर, लखनऊ कड़ी धूप में  घोडा गाड़ी चालकों  से  जबरदस्ती काम लेने से रोकने के लिए  जांच अभियान चलाया है।

आज दोपहर में  सोसाइटी फॉर एनिमल वेलफेयर  की अध्यक्षा सबा बानो जो भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की लखनऊ जनपद की मानद जिला जीव जंतु कल्याण अधिकारी भी हैं , ने  घोड़ों के ऊपर  होने अत्याचार को रोकने के लिए "घोड़ा अभियान" चलाए जाने की जानकारी दी। सबा ने बताया कि दुबग्गा रोड, ठाकुरगंज और टीवी टावर के पास   दोपहर 12 बजे से  2 बजे तक  घोड़ा गाड़ी  चालकों की जांच- पड़ताल की गई। इस अभियान के तहत आज मात्र 2 घोड़ा गाड़ी दिखी जिसमें से एक घोड़ा गाड़ी खाली थी और दूसरी ओवरलोड  पाई गई।  जांच के दौरान यह पाया गया कि दोनों  घोड़ा गाड़ियों के चालकों के पास -चारा पानी नहीं था। सोसायटी फॉर एनिमल वेलफेयर की ओर से घोड़ा गाड़ी चालक को कड़ी हिदायत दी गई और कहा गया कि भविष्य में जीव जंतु क्रूरता निवारण अधिनियम का पालन करें अन्यथा उनके ऊपर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। मोहित और फरहाना  के अनुसार आज घोड़ा अभियान के तहत एक घोड़े का उपचार किया जो जांच के दौरान जख्मी पाया गया।

जांच टीम के प्रदीप कुमार वर्मा ने  बताया कि संस्था ने जहां घोड़ा वाहन चालकों को एक तरफ चेतावनी दी गई वहीं दूसरी ओर  राहगीरों  को भी बताया कि जब कभी भी  ओवरलोडेड गाड़ी दिखाई दे  तो   तुरंत इसकी सूचना पुलिस और उनकी संस्था को दी जानी चाहिए ताकि उस पर सख्त कानूनी कार्यवाही किया जा सके।  रिजवान ने बताया कि अभियान के दौरान ओवरलोड वाली गाड़ियों के चालकों को हिदायत देते हुए उनसे उनकी चाबुक भी ले ली गई। संस्था के  इस अभियान  के बारे में जानकारी देते हुए  एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट मनीष श्रीवास्तव तथा अमित गुप्ता ने बताया कि  घोड़ा अभियान चलाने की वजह से घोड़ा वाहन चालकों की सोच में  काफी फर्क नज़र आ रहा है इसका नतीजा है किइस समय कड़ी दोपहर में  घोड़ा गाड़ियों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित हो गया है। अविनाश कुमार ने बताया कि सोसायटी फॉर एनिमल वेलफेयर का यह अभियान अभी इस रूट पर जारी रहेगा क्योंकि यहां से घोड़ा गाड़ियों का अक्सर आना-जाना बना रहता है।

सोसाइटी फॉर एनिमल वेलफेयर आज के इस अभियान में मनीष श्रीवास्तव, अमित गुप्ता,  अवनीश कुमार, मोहसिन सिद्दीकी,  फरहाना मलिकी, रिजवान मलिकी, प्रदीप कुमार वर्मा और शबा बानों  बानो सहित कई स्थानीय पशु प्रेमी भी शामिल थे।

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